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एनएल चर्चा के इस अंक में बिलक़ीस बानो मामले में हुई रिहाई और देश की न्यायिक व्यवस्था पर विशेष रूप से बातचीत हुई. इसके अलावा राजस्थान में एक दलित बच्चे की शिक्षक द्वारा पीटने से हुई मौत और सरकार द्वारा मुफ्त लाभ देने के विवाद पर भी चर्चा की गई.चर्चा में इस हफ्ते अहमदाबाद से अधिवक्ता ज़किया सुमन, पत्रकार हृदयेश जोशी और न्यूज़लॉन्ड्री के सह-संपादक शार्दूल कात्यायन शामिल हुए. संचालन कार्यकारी संपादक अतुल चौरसिया ने किया. चर्चा की शुरुआत बिलक़ीस बानो मामले से होती है. इस पूरे मामले पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अतुल सवाल करते हैं, “जिस कमेटी ने यह फैसला किया उस कमेटी का जो चरित्र है, जो स्वरूप है, वह बेहद संदिग्ध है. तो यहां पर सबसे बड़ा सवाल हितों के टकराव का है.इस सवाल के जवाब में ज़किया कहती हैं, “पैनल को लेकर जो मीडिया में चर्चा हो रही है यह भी एक तरह से कोशिश है अस्ल मुद्दे से ध्यान भटकाने की. जो मुद्दा मूल रूप से है वह यह है कि देश भर में जो हज़ारों लाखों क़ैदी सजा काट रहे हैं और उनमें जो उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, वह अपील करते रहते हैं माफ़ी नीति के तहत तो क्या उनमें से किसी भी क़ैदी को आपने रिहा कर दिया? कैदी तो अपील करेगा मगर सरकार को यह देखना है कि उसका जो अपराध था वो कितना घिनौना था. प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से बोलते हैं कि हम महिलाओं के सम्मान का संकल्प लेंगे और उसी दिन उन क़ैदियों को रिहा किया जाता है, पहली विचलित करने वाली बात यही है. यह इत्तेफ़ाक़न हो सकता है, मानना कठिन है, लेकिन प्रतीक के तौर पर यह काफी परेशान करने वाला बिलक़ीस मामले और बलात्कार के विषय पर शार्दूल कहते हैं, “बलात्कार के बारे में जब लोग बात करते हैं, मैं एक पुरुष हूं तो मैं इसकी कभी कल्पना भी नहीं कर सकता, लेकिन यौन हिंसा सेक्सुअल नहीं बल्कि पावर का क्राइम है.00:00:00 - 00:02:50 - इंट्रो और जरूरी सूचना00:02:50 - 00:10:55 - हेडलाइंस00:10:55 - 00:48:13 - बिलकिस बानो केस और दोषियों की रिहाई00:48:15 - 00:57:45 - राजस्थान में दलित छात्र की मौत 00:57:05 - 01:18:45 - मुफ्त सरकारी योजनाएं01:18:45 - 01:26:15 - सलाह और सुझाव एज़किया सुमन FiraaqParzania Garm Hava शार्दूल कात्यायन बिलकीस बानो केसपरिवारवादी रामदेव: पतंजलि में रामदेव तो बस ‘एंकर’ हैं, असली मालिक तो कोई और है!Afghanistan: Last Week Tonight with John Oliver (HBO)हृदयेश जोशी Sense And SolidarityAn Uncertain Gloryअतुल चौरसिया The Hindu editorialIndian Express editorial Pratap bhanu mehta Article Hosted on Acast. See acast.com/privacy for more information.

