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हमारी सनातन संस्कृति में सदियों से चली आ रही अनेक कथाएँ इस बात की साक्षी हैं कि तात्कालिक लोभ का मूल उद्देश्य वस्तुतः आदर्शों व मूल्यों के प्रति हमारी निष्ठा की परीक्षा लेना होता है। सिद्धांत-व्रत की ऐसी परीक्षाओं का तात्कालिक परिणाम चाहे जो भी हो पर सफलता और असफलता की सामान्य बहसों से असंपृक्त समय की सूची में नायकों का दर्जा केवल सत्यनिष्ठ प्रतिभाओं को ही मिल पाता है।

