कुछ कही,कुछ अनकही (Kuch Kahi,Kuch Unkahi)
कुछ कही,कुछ अनकही (Kuch Kahi,Kuch Unkahi)
Nitin Joshi
नादान दोस्त :मुंशी प्रेमचंद
12 minutes Posted Aug 9, 2020 at 2:30 pm.
0:00
12:13
Download MP3
Show notes
ये कहानी है ,दो बच्चों की जो चिड़ियाँ के अंडे देखने की लालसा में, वो एक भूल कर बैठ थे ,है जिससे चिड़ियाँ के अंडे टूट जाते है ,और फिर उनको अपने किये पर बहुत पछतावा होता है । वो अंडे कैसे टूटते है ? ,क्या ग़लती करते है वो जिसका उनको पछतावा होता है । उसे के लिए सुनिए ये कहानी नादान दोस्त . तो मिलते है फिर अगले हफ्ते एक नई कहानी के साथ ठीक रात 8 बजे । तब तक बने रहिये मेरे साथ और सुनते रहिये "कुछ कही कुछ अनकही " नितिन जोशी की आवाज़ में .
तो मिलते है फिर अगले हफ्ते एक नई कहानी के साथ ठीक रात 8 बजे ।
तब तक बने रहिये मेरे साथ और सुनते रहिये "कुछ कही कुछ अनकही " नितिन जोशी की आवाज़ में ।
---
Support this podcast: https://podcasters.spotify.com/pod/show/nitin-joshi40/support