Show notes
सब उस से प्यार करते थे। उस की शक्ल-ओ-सूरत मामूली थी। मगर उस में ग़ैरमामूली कशिश थी। हर वक़्त उस के चेहरे पर तिमतिमाहट खेलती रहती जो उस की मासूमियत पर हॉले का काम देती थी। वो हर वक़्त ख़ुश रहता था। बहुत ज़्यादा बातूनी था, मगर अख़्तर को हालाँ कि वो दिल का मरीज़ था और इस मर्ज़ के बाइस बहुत चिड़चिड़ा हो गया था, उस की ये आदत खुलती नहीं थी।चूँकि उस का बिस्तर अख़्तर के बिस्तर के पास थाl इस लिए वो थोड़े थोड़े वक़्फ़ों के बाद उस से गुफ़्तुगू शुरू कर देता था जो छोटे छोटे मासूम जुमलों पर मुश्तमिल होती थी।
आइए सुनते है पूरी कहानी.......
कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएं और अपनी फरमाइश भी बताइए
Instagram: nishlifequotes



