इस दुनिया में जी रही मानवजाति अब अंतिम मुकाम की ओर बढ़ रही है। जलवायु संकट इस पृथ्वी गृह के लिए इतना गंभीर खतरा है कि पूरी दुनिया ने जलवायु परिवर्तन पर समजौते पर हस्ताक्षर किए हैं, प्रत्येक देश ने औद्योगिक पुनर्गठन के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए बनाई की गई नीतियों को अपनाया है। पूरी दुनिया युद्ध के माहौल से घिरी हुई है जो एक बार फिर शीत युद्ध के बाद के दौर को अपनी चपेट में ले रही है। चल रही महामारी, युद्ध और कच्चे माल और भोजन में बढ़ते संरक्षणवाद से उपजा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला अस्थिर हो रही है, जबकि मुद्रास्फीति अनियंत्रित चल रही है, जिससे गरीबी आने का खतरा है। पहले से ही ऐसे देश हैं जो कर्ज संकट से जूझ रहे हैं। इस सब के बीच, 21वीं सदी में महान शक्तियां एक-दूसरे से आधिपत्य को लेकर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। यह और अन्य कई कारक पूरी दुनिया को अस्थिर कर रहे हैं और राष्ट्रों के बीच आसन्न युद्ध के संकेत दिखा रहे हैं।
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