श्रीराम-कथा भाग-14 -परम श्रद्धेय पूज्य श्रीमानस मधुकरजी महाराज द्वारा (ज्ञानसंजीवनी परिवार)
यत् रामकृष्णगाथा जगतीतलेषु ख्याता। तत् ज्ञानसंजीवनी तु संसारे प्रसिद्धा।।
ज्ञानसंजीवनी ज्ञानसिन्धु है भक्ति रस की धारा है
वैराग्य की पृष्ठभूमि में विचरण लक्ष्य हमारा है।
वैदिक ऋचाएं सिखलाती पुराणों का पाठ पढ़ाती
उपनिषदों में अन्वेषण कर जड़ मन को चैतन्य बनाती।
सत्य सनातन की सेवा ही बस संकल्प हमारा है
ज्ञानसंजीवनी ज्ञानसिन्धु है भक्ति रस की धारा है
वैराग्य की पृष्ठभूमि में विचरण लक्ष्य हमारा है।
संस्कृत को सरल बनाती व्यासपीठ से अलख जगाती
संस्कृति कि श्रेष्ठ भूमि में संस्कार के पेड़ उगाती
शिवदास का यह संयोजन संतजनों को प्यारा है
ज्ञानसंजीवनी ज्ञानसिन्धु है भक्ति रस की धारा है
वैराग्य की पृष्ठभूमि में विचरण लक्ष्य हमारा है।
लेखक उपदेशक है देती वक्ता विश्लेषक है देती
गायन वादन शिक्षण देती रोजदार संरक्षण देती
वसुधैव कुटुम्बकम ही ये तु उद्देश्य हमारा है
ज्ञानसंजीवनी ज्ञानसिन्धु है भक्ति रस की धारा है
वैराग्य की पृष्ठभूमि में विचरण लक्ष्य हमारा है।



