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नमस्कार, लौहनगरी जमशेदपुर से नाता रखने वाले सतप्रीत सिंह बड़े सपने देखने वालों में से एक हैं, जिन्होंने भरोसे की बदौलत अब तक कई जुनूनी सपनों को हासिल किया है। अपने सपनों को लंबे अरसे तक पाले रखने का सामर्थ्य उनकी ख़ूबी है। वर्तमान में टाटा स्टील में कार्यरत हैं। स्कूल के दिनों से लिखते आए हैं और शिक्षकों के ख़ास चहेते रहे हैं। बचपन से ही हिंदी साहित्य से लगाव रहा है। अक्सर फ़िल्मी गाने और संवाद इन्हें भीतर तक टटोल जाते थे। अख़बार में छपने वाली साप्ताहिक कहानियाँ इन्हें और भी शिद्दत से साहित्य के क़रीब ले आईं। कविताओं के अलावा इन्हें कहानियाँ, तुकबंदियाँ, गाने और ग़ज़लें लिखने का शौक़ है। आज भी कई बेटियाँ होती हैं जो घर से निकलती हैं तो उनका काम से ज़्यादा ध्यान घड़ी की सुइयों पर होता है। क्योंकि वक़्त पर घर लौटने की हिदायतें जो मिली होती हैं। कुछ ऐसी ही मजबूर बेटियों के हवाले से लिखी गयी यह कविता आप सबकी नज़्र में पेश है। आप इन्हें इंस्टाग्राम पर @author_satpreet_singh के नाम से पढ़ सकते हैं। यह रहा उनके इंस्टाग्राम पेज का लिंक:http://instagram.com/author_satpreet_singhइस ख़ूबसूरत पॉडकास्ट का संचालन रवि डढवाल ( Ravi Dadhwal) द्वारा किया गया है, जिनकी https://instagram.com/alfaazbyravi?utm_medium=copy_linkआप हमारे Insta page @eccentric_quotes से भी जुड़ सकते है :https://instagram.com/eccentric_quotes?igshid=1at7id8lfna3m



