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निर्मला - मुंशी प्रेमचंदइस बुक में पढ़ो तो इतनीबार निर्मला रोती रहती है।मनमे आपको सारा आंसू पानी से तालाब ही नज़र आये।पर फिर जब आप प्रेमचंद की लाइनों में छिपे गए अर्थ को समझने की कोशिश करते हो तो समजमे आता है कि किस ओर लेखक इशारा करते है। निर्मला मुंशी प्रेमचंद का यथार्थपरक ओर मनोवैज्ञानिक तथ्यों से भरा उपन्यास है।इस उपन्यास का मूल उद्देश्य समाज की कुरीतियो का पर्दाफाश करके उनका उन्मूलन करना है। मन के बुरे स्वभाव का बाह्य परिस्थितियों पर कैसा कैसा असर होता है,उसे दिखाते है। प्रतिशोध, स्वार्थ ,लालच ,मोह चोरी, शंका कैसे मनुष्य के जीवन को ओर उसके आसपास वालो को तबाह कर देती है,यह समजाता है। जी हा ये कहानी ज़रूर ही काल्पनिक है,पर जूठी नही।आज से कई दशक पहले के भारत की कहानी है,पर आज भी उससे शीख सकते है।उसके ऊपर तहरीर नामकी सीरियल भी बनी है जो दूरदर्शन पर प्रसारित होती थी।तो आइए जानते है पूरी कहानी और बादमे में आपको कहूंगी की आपको क्यो ये कहानी पढ़नी चाहिये और अन्तमे हम इसमे मिली शीख के बारेमे चर्चा करेंगे।



