
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजग एवम महागठबंधन से अलग होकर एक तीसरे मोर्चे के गठन की उम्मीद की जा रही है। इस उम्मीद के पीछे राजनीतिक कारण यह है कि महागठबंधन एवं राजग में घटक दलों की स्थिति देखे तो राजग में जहां कुल तीन दल हैं वहीं महागठबंधन में वर्तमान में कुल पांच दल शामिल हैं।महागठबंधन में शामिल पांच दलों में बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों के लिए उम्मीदवारों ने अपने-अपने पार्टियों के आलाकमान पर दबाव बनाना चालू कर दिया है। इसी दबाव को लेकर महागठबंधन में फूट की संभावना दिख रही है। सभी पार्टियां अपने लिए सम्मानजनक सीटों की मांग कर रही है। महागठबंधन में सीटों की उम्मीदवारी को लेकर राजद जहां बड़े भाई की भूमिका में रहकर ज्यादा से ज्यादा सीटों पर अपनी दावेदारी ठोक रहा है वहीं उसके बाद कांग्रेस नंबर दो की हैसियत से उसके बाद अपनी उम्मीदवारी के लिए ज्यादा सीटों की चाहत रखता है इस तरह ही महागठबंधन में शामिल रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा,हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी एवं विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश साहनी अपने-अपने पार्टियों के लिए भी ज्यादा सीटों की अपेक्षा रखते हैं और ज्यादा से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार चुनाव में उतारना चाहते हैं। लेकिन वर्तमान परिस्थिति में सभी दलों को खुश कर पाना महागठबंधन में संभव नहीं दिख रहा है और इसी असंतोष को लेकर तीसरे मोर्चे के गठन की उम्मीद जताई जा रही है। मेरा निजी तौर पर यह मानना है कि अगर राजद एवं महागठबंधन के बदले तीसरे मोर्चे का गठन हो और उसमें प्रशांत किशोर, प्रियम पुष्पा चौधरी, जन अधिकार पार्टी के पप्पू यादव, भाजपा के कन्हैया कुमार, रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी, विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी एक साथ आए और अपने मनोकांक्षाओं को दरकिनार कर राज्य हित में विकास के लिए बिहार हित में एक होकर चुनाव लड़ें तो शायद जनता इन्हें ही ज्यादा तरजीह दे सकती है। वैसे राजनीतिक परिणाम कभी भी बदल सकते हैं यह समय चक्र पर निर्भर होने वाली बात है। यशवंत कुमार चौधरी बादशाह मोबाइल नंबर 9284603063
Mar 22, 2020
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