कल थी काशी, आज है बनारस
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Banarasi/singh
Vijaya-dashmi: कहानी आदि शक्ति नव दुर्गा के उदय की, mahisasur के अंत की कहानी
15 minutes Posted Oct 18, 2021 at 4:06 am.
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जय माता दी, कैसे हैं आप सब. सभी स्वास्थ्य और सुरक्षित होंगे यही माता से कामना है. Banarasi/ सिंह के podcast में आप सब का तहे दिल से स्वागत hai। आज की कहानी उस भ्रम को दूर करने के लिए जो हमसे और आपसे बहुत लंबे समय से हो rahi। विजय दशमी और दशहरा एक दिन मनाए जाने वाले दो अलग मान्यता वाले त्यौहार hai। कैसे? अच्छा सवाल पूछा। विजय दशमी अश्विनी माह के शुक्ल पक्ष के दशमी को मनाई जाती है पर ये देवी दुर्गा के महिषासुर पर विजय का दिवस hai। दशहरा भी इस सी दिन मनाया जाता है पर ये श्री राम की रावन पर विजय का दिवस hai। यानी दोनों कहानी का महत्व एक है सत्य की विजय और असत्य का नाश पर पात्र और घटना और समय बिल्कुल अलग अलग hai। देवी आदि शक्ति की आराधना स्वय श्री राम ने भी की थी। रावन वध से पूर्व इसलिए लोग भ्रम में हैं कि दोनों एक ही hai।नहीं विजय दशमी में माता ने महिषासुर के साथ उसकी संपूर्ण आसुरी सेना और आतंक को नष्ट किया। यह युद्ध नव दिन चला था जब देवता देवी की स्तुति कर उनको ताकत वर बनाते थे इसलिए हम मानव भी अपनी माँ की आराधना कर नव दिन में उनकी शक्ति बढ़ा ते है और फिर दशमी को उनको विसर्जित करते है, अगले साल तक के लिए उनसे सुरक्षा और संरक्षण पा कर। बाद में शाम में या रात्री में मेला लगता है जहा रावन, कुंभकर्ण और इंद्रजीत को फूंका जाता है। आगे और क्या हुआ जानने के लिए सुनते रहिये banarasi/ singh अपनी होस्ट और दोस्त ka पॉडकास्ट। फिर मिलेंगे नयी कहानी और नए विचार के साथ तब तक अपना और अपनों का ख्याल रखिए। जय माता दी।